एक हफ्ते में ही आ सकता है तीन तलाक पर फैसला
अगर अदालत को लगेगा कि तीन तलाक महिलाओं के अधिकार का उल्लंघन है तो तीन तलाक की प्रथा पर रोक लगेगी। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट को लगेगा कि तीन तलाक धार्मिक मामला है और इसका कानून से कोई लेना देना नहीं है तो फिर इसकी सुनवाई नहीं होगी।
अगर अदालत को लगेगा कि तीन तलाक महिलाओं के अधिकार का उल्लंघन है तो तीन तलाक की प्रथा पर रोक लगेगी। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट को लगेगा कि तीन तलाक धार्मिक मामला है और इसका कानून से कोई लेना देना नहीं है तो फिर इसकी सुनवाई नहीं होगी।
सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक पर सुनवाई के पहले दिन ही तीखी बहस हुई। अब कोर्ट ने सुनवाई का दायरा तय कर लिया है । अदालत ये तय करेगी की तीन तलाक मुस्लिम महिलाओं के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है या नहीं। अगर अदालत को लगेगा कि तीन तलाक महिलाओं के अधिकार का उल्लंघन है तो तीन तलाक की प्रथा पर रोक लगेगी। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट को लगेगा कि तीन तलाक धार्मिक मामला है और इसका कानून से कोई लेना देना नहीं है तो फिर इसकी सुनवाई नहीं होगी। कोर्ट ने एक और फैसला किया है। बहस सिर्फ तीन तलाक पर ही होगी, बहु विवाह यानि एक मुस्लिम मर्द को चार बीवी रखने के अधिकार पर फिलहाल कोई फैसला नहीं होगा, ना ही चार बीवी वाले मसले पर फिलहाल सुनवाई होगी। सुनवाई कर रही संविधान पीठ में अलग-अलग धर्म के पांच जज इस मसले को सुनेंगे। पहले तीन दिन तीन तलाक के खिलाफ याचिका देने वाले पक्ष को अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। इसके बाद तीन दिन तक उन लोगों की बात सुनी जाएगी जो तीन तलाक की पैरवी कह रहे हैं औऱ इसे जरूरी बताते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि फैसला देने से पहले वो उन देशों के कानून को भी देखेगा जिनमें तीन तलाक को बैन किया गया है।



